सबसे उम्रदराज महिला बनीं ऑर्गन डोनर, अंगदान कर बचाई 2 लोगों जान

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इंसान अपनी जिंदगी में काफी लोगों को काम आता है, लेकिन कुछ लोग मौत के बाद भी इंसानियत के लिए मिसाल पैदा कर जाते हैं. ऐसा ही कुछ हुआ दिल्ली के एम्स अस्पताल में जब ब्रेन डेड डिक्लेयर किए जाने के बाद 78 साल की बुजुर्ग महिला का ऑर्गन डोनेट किया गया. इस तरह वो सबसे उम्रदराज अंगदाता बन गई. आइए जानते हैं पूरा वाक्या.

हादसे का शिकार हुईं बुजुर्ग महिला

यूपी के बुलंदशहर की निवासी माया सोलंकी (Maya Solanki) 19 दिसंबर 2023 को सीढ़ियों से गिरकर बुरी तरह घायल हो गईं, उनके बेटे राकेश कुमार (Rakesh Kumar) ने बताया कि घायल होने के बाद मां को एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका, 21 दिसंबर को डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

परिवार ने किया अंगदान का फैसला

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए माया सोलंकी के बेटे राकेश कुमार ने कहा, ‘मेरी मां ने अपने पूरे जीवन में परोपकार का काम किया. उन्होंने जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए खुद को समर्पित किया और अक्सर कम भाग्यशाली लोगों को भोजन और कपड़े दान किए.जब हमें ‘आंगदान महादान’ के बारे में पता चला, तो हमने जरूरतमंदों के लिए उनके ऑर्गन डोनेट करने का फैसला किया.’

अंगदान से बची 2 लोगों की जिंदगी

माया सोलंकी के गुर्दे और लिवर 2 लोगों को दान किए गए जिनमें एम्स में 51 साल की महिला और आईएलबीएस अस्पताल में 41 साल के पुरुष शामिल हैं.इस तरह अंगदाता ने मौत के बाद भी दो जिंदगियां बचाने में मदद की. डोनर के कॉर्निया को डॉ. आरपी सेंटर में और त्वचा को स्किन बैंक में प्रिजर्व किया गया.

‘उम्र की सीमा नहीं’

एम्स ट्रॉमा सेंटर के हेड डॉक्टर कामरान फारूकी (Dr. Kamran Farooque) ने टाइम्स ऑफ इंडिया को कहा कि ये एम्स ट्रॉमा सेंटर में 14वां ऑर्गन डोनेशन है. लोगों को अंगदान के लिए आगे आना चाहिए. इससे गंभीर रूप से बीमार लोगों को नई जिंदगी दी जा सकती है.

डॉक्टर्स के मुताबिक, ये मिथ फैला हुआ है कि बुजुर्ग इंसान ऑर्गन डोनेट नहीं कर सकते, लेकिन सच्चाई ये है कि अंगदान के लिए कोई तय उम्र सीमा नहीं है. 70 से 80 साल के डोनर्स के अंगों को कामयाबी के साथ ट्रांसप्लांट किया जा सकता है. अंगदान का फैसला मेडिकल कंडीशन पर लिया जाता है, न कि उम्र के आधार पर.

2015 में ये थे सबसे उम्रदराज डोनर

साल 2015 में 75 साल के अलीगढ़ के रहने वाले पुरुष की फैमिली ने अंदगान किया था. इस डोनर को इंटरसेरीब्रल हेमोरेज (intracerebral hemorrhage) की वजह से ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था, ब्लीडिंग की वजह से ब्रेन टिश्यू में स्ट्रोक आ गया था.अंगदान के जरिए काफी लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है, लेकिन भारत में ऑर्गन डोनर्स की तादात जरूरत के हिसाब से काफी कम है. 

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